कैसे पता करें कि बच्चे के पेट में कीड़े हैं?HealthPlanet

Posted on Tue 18th Oct 2022 : 10:21

शिशु या बच्चे के पेट में कीड़े: कैसे पता लगाएं
शिशु के पेट में कीड़े होने का क्या मतलब है?
इसका मतलब है कि आपके शिशु की आंतों में कीड़े या कृमि का संक्रमण है।

हो सकता है आपके शिशु के शरीर में ये कीड़े किसी दूसरे व्यक्ति से, संक्रमित मिट्टी में नंगे पैर चलने से, दूषित पानी में खेलने से या फिर अशुद्ध भोजन खाने से आ गए हों।

जब इन अंडों में से कीड़े निकलते हैं, तो ये और बढ़ जाते हैं और शिशु के शरीर में और अंडे दे देते हैं।
शिशुओं और बच्चों में कीड़ों का इनफेक्शन होना कितना आम है?
कीड़ों का संक्रमण काफी आम हैं और आसानी से फैलता है। हालांकि, यह बता पाना मुश्किल है कि ये इनफेक्शन​ कितने आम हैं, क्योंकि इनके अक्सर कोई लक्षण नहीं होते और इनके बारे में सूचना भी नहीं मिल पाती।

अध्ययनों के अनुमान के अनुसार भारत में रहने वाले हर पांच में से एक व्यक्ति को कम से कम एक प्रकार का कीड़ों का संक्रमण अवश्य होता है। वहीं, छोटे बच्चों में तो यह इससे भी अधिक आम माना जाता है।कीड़ों के अलग-अलग तरह के इनफेक्शन होते हैं। पिनवर्म जिन्हें थ्रेडवर्म भी कहा जाता है छोटे बच्चों को प्रभावित करने वाले सबसे आम प्रकार के कीड़ें हैं। ये मोटे धागे के टुकड़े जैसे दिखते हैं, इनकी लंबाई करीब स्टेपल पिन जितनी, तीन मि.मी. से 10 मि.मी. तक लंबी हो सकती है।

हुकवर्म, राउंडवर्म और व्हिपवर्म इनफेक्शन भी भारत में आम हैं। शिशु में कीड़ों के इनफेक्शन का पता चलना काफी परेशान कर देने वाला हो सकता है। सौभाग्यवश, इन कीड़ों से पीछा छुड़ाना काफी आसान है और इसमें अपेक्षाकृत कम समय लगता है।
कीड़ों का इनफेक्शन होने के क्या लक्षण हैं?
अधिकांशत: कीड़ों का इनफेक्शन होने के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। या फिर हो सकता है कि ये लक्षण इतने हल्के हों, कि उन पर ध्यान ही न जाए।

शिशु को कीड़ों का कौन सा संक्रमण हुआ है और यह कितना गंभीर है, इसे देखते हुए बच्चे में कुछ आम संकेत या लक्षण हो सकते हैं। अगर आपके बच्चे को इनमें से कोई भी लक्षण हो, तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं:

पेट में दर्द।
वजन घटना।
चिड़चिड़ापन।
मिचली।
मल में खून आना।
उल्टी या खांसी, संभव है कि खांसी या उल्टी के जरिये कीड़ा बाहर निकल आए।
गुदा के आसपास खुजली या दर्द, जहां से कीड़े अंदर दाखिल हुए। यह खासकर पिन वर्म के मामलों में होता है।
खुजलाहट की वजह से ठीक से नींद न आना।
मूत्रमार्ग संक्रमण (यू.टी.आई.) की वजह से बार-बार पेशाब जाना। यह लड़कियों में अधिक आम है।
आंतरिक रक्तस्त्राव जिससे की आयरन की कमी और एनीमिया, पोषक तत्वों का सही अवशोषण न होना, दस्त (डायरिया) और भूख न लगना जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
अगर, बहुत सारे कीड़े हों, तो आंतों में अवरोध भी हो सकता है, मगर ऐसा बहुत ही दुर्लभ है। कुछ बच्चों में उल्टी के साथ कीड़े निकल सकते हैं (आमतौर पर राउंड वर्म जो कि अर्थवर्म जैसे दिखते हैं)।
गंभीर टेपवर्म इनफेक्शन की वजह से दौरे भी पड़ सकते हैं।
पाइका (न खाने योग्य, अपौष्टिक चीजें जैसे कि मिट्टी, चॉक, कागज आदि खाना) भी कीड़ों का इनफेक्शन होने का एक अन्य संकेत है।


कुछ डॉक्टरों का कहना है कि दांत पीसना भी कीड़ों का संक्रमण होने का संकेत हो सकता है। मगर इस विषय पर शोध​कर्ताओं की राय अलग-अलग है।

अगर, आपके शिशु को थ्रेडवर्म का हल्का संक्रमण हो, तो हो सकता है उसे कोई लक्षण न हों। वह नितंबों में खुजली होने की शिकायत कर सकता है, खासकर कि रात में।

शिशु के सो जाने के बाद रात को उसके नितंब देखें। उसके दोनों नितंबों को थोड़ा अलग करते हुए, टॉर्च की रोशनी से उसकी गुदा के आसपास की जगह देखें। अगर, उसे थ्रेडवर्म हुए तो, आपको एक या इससे ज्यादा कीड़े बाहर निकलते हुए, या शिशु के पायजामे और चादर पर दिख सकते हैं। शिशु के मल में भी आपको ये थ्रेडवर्म दिख सकते हैं।

यदि आपके शिशु को हुकवर्म से इनफेक्शन हुआ है, तो उसे निम्न लक्षण हो सकते हैं:

जिस जगह से कीड़ों ने त्वचा में प्रवेश किया है, उस स्थान पर चकत्ते और खुजलाहट हो सकती है, विशेषकर पित्ती ​(हाइव्स-आर्टिकेरिया)
एनीमिया

अगर आपके शिशु को ऐसे कोई भी लक्षण हों, तो अधिक जानकारी व उपचार के लिए अपने डॉक्टर से बात करें।
कीड़ों के संक्रमण का पता लगाने के लिए कौन सी जांचें कराई जाती हैं?
शिशु में कीड़ों का पता लगाने का सबसे बेहतर तरीका यही है कि उसकी जांच डॉक्टर से करवाई जाए। डॉक्टर नीचे दी गई जांचों में से एक जांच करवाने के लिए कह सकते हैं, जिससे शिशु में कीड़ों के इनफेक्शन का पता चल सके:

मल की जांच। डॉक्टर आपके शिशु के मल का नमूना लेने के लिए भी कह सकते हैं। इस नमूने को जांच के लिए लैब में भेजा जाएगा, ताकि कीड़ों या कीड़ों के अंडों का पता लगाया जा सके।

स्टिकी टेप टेस्ट। यह जांच थ्रेडवर्म के लिए की जाती है, और इसमें शिशु के नितंबों के आसपास टेप का एक टुकड़ा चिपकाया जाता है, ताकि संभावित कीड़ों के अंडों को इकट्ठा किया जा सके। इस टेप को फिर लैब में जांच के लिए भेजा जाता है।

नाखूनों के नीचे देखना। डॉक्टर शिशु के नाखूनों के नीचे कीड़ों के अंडे होने की जांच कर सकते हैं।

रुई के फाहे (कॉटन-बड स्वॉब) से जांच। डॉक्टर या नर्स शिशु के नितंबों के आसपास रुई के फाहे से पौंछकर कीड़े होने का पता लगा सकते हैं।

अल्ट्रासाउंड जांच। यह आमतौर पर तब कराया जाता है, जब शिशु के शरीर में बहुत सारे कीड़े हों। अल्ट्रासाउंड में डॉक्टर कीड़ों की वास्तविक स्थिति का पता लगाएंगे।

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